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निदेशकों के लिए आचरण संहिता

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निगमित शासन

निदेशकों के लिए आचरण संहिता

निदेशकों के लिए आचरण संहिता सूचीबद्ध समझौते के खण्ड 49 एवं अच्छी निगमित शासन पद्धति की आवश्यकतानुसार बनाया गया है।

राष्ट्रीय केमिकल्स एण्ड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (इसके बाद कंपनी  के रूप में संदर्भित किया जाएगा) नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए वचनबद्ध है । यह संहिता इस बचनबद्धता का समर्थन करने वाले व्यवहार के सिद्धांतों को प्रतिबिम्बित करती   है । संहिता में दिए गए आचरण को बनाए रखने और इन मानकों को विधिवत एवं नियंत्रण आवश्यकताओं के औचित्य के अनुसार अद्यतन करने का दायित्व निदेशक मंडल का होगा । प्रत्येक निदेशक के लिए इस कोड को पढना और समझना तथा उसके दायित्व के कार्यनिष्पादन में इसके कार्यान्वयन को जानना आवश्यक है । सेबी, कंपनी अधिनियम की आवश्यकतानुसार  इस संहिता का अनुवर्तन, प्रत्येक निदेशक की  जबाबदेही होगी ।

1. परिभाषाएं :

i)मंडल या निदेशक मंडल या निदेशकों का अर्थ होगा तत्कालीन सभी निदेशक, जो कंपनी के निदेशक मंडल में हैं, चाहे वे कार्यपालक या गैर-कार्यपालक हैं, या स्वतंत्र या गैर-स्वतंत्र निदेशक हैं और संहिता के लागू करने के उद्देश्य से सभी वरिष्ठ प्रबंधन कर्मियों का इसमें समावेश है ।

ii)  वरिष्ठ प्रबंधन कर्मी : का अर्थ होगा कंपनी के सभी कार्यपालक (निदेशकों के अलावा) जो कंपनी के प्रमुख प्रबंधन टीम का हिस्सा हैं और साथ ही सभी प्रकार्य प्रमुख जैसा भी कंपनी द्वारा निश्चित किया जाता है ।

iii) कंपनी, या  आरसीएफ का अर्थ होगा राष्ट्रीय केमिकल्स एण्ड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड ।

2. अनुप्रयोज्य :

यह संहिता सभी निदेशकों, वरिष्ठ प्रबंधन पर लागू है और 1 अप्रैल, 2005 से प्रभावी  होगी ।  संहिता को समय-समय पर सुधारा, बदला, परिवर्तित या संशोधित किया जा सकता है ।


3. आरसीएफ कर्मचारी (आचरण, अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1993 :

आरसीएफ के  निदेशक मंडल ने आरसीएफ कर्मचारी (आचरण, अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1993 बनाई है, जो कंपनी के सभी कर्मचारियों पर लागू है । यह कथित नियमावली एवं  इसमें किया जाने वाला कोई भी सुधार एवं संशोधन जैसा भी उचित हो  कार्यपालक निदेशकों पर भी लागू है । यह संहिता, कथित नियमावली, उसमें किए गए बदलावों एवं संशोधनों के अतिरिक्त हैे ।

4. संहिता का अनुपालन :

प्रत्येक निदेशक को वार्षिक आधार पर संहिता के अनुपालन की अभिपुष्टि करनी होगी,  जो कि कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक द्वारा प्रमाणीकरण का आधार होगी ।

5. अनुपालन अधिकारी :

कंपनी ने, कंपनी सचिव को इस संहिता के कार्यान्वयन के लिए अपने अनुपालन अधिकारी के रूप में पदनामित किया है । निदेशक अपने विवेकाधिकार के अनुसार इस संहिता के प्रति कोई रिपोर्ट या शिकायत अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक या अनुपालन अधिकारी से कर सकतेे हैं । अनुपालन अधिकारी, जैसा भी उचित होगा, शिकायतोंे को, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के पास भेजेगा ।

6. लागू कानूनों का अनुपालन :

निदेशकों को  कंपनी और उसके  व्यवसाय पर लागू  होने वाले सभी कानूनों, नियमों एवं विनियमों का अनुपालन करना होगा ।

यह संहिता कंपनी और व्यवसाय पर लागू सभी कानूनों, नियमों  एवं विनियमों का सार नहीं है । कंपनी, निदेशकों, को विशिष्ट  कानूनों, नियमों एवं विनियमों पर कंपनी द्वारा तैयार  की गयी विभिन्न सामग्रियों एवं मार्गदर्शी सिद्धातों की प्रतियाँ प्रदान करेगी । यदि निदेशकोंे को किसी कानून की अनुप्रयोज्यता  के प्रति शंका है तो वे इस संबंध में अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अथवा अनुपालन अधिकारी से परामर्श कर सकते हैं ।

7. हितों का विरोधाभास :

हितों का विरोधाभास तब हो सकता है, जब निदेशक के हितों और किसी भी तरह से कंपनी के हितों के बीच विरोधाभास हो (या विरोधाभास प्रतीत हो) । निदेशकों को कंपनी के अंदरूनी व्यापार संहिता के अनुसार व्यक्तिगत निवेश करने के लिए स्वातंत्र्य होना चाहिए । उनके कोई ऐसे हित  नहीं होने चाहिए जो उनके दायित्व निष्पादन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हों । विरोध की स्थिति तब उत्पन्न हो सकती है, जब निदेशक ऐसी कार्रवाई करता है या उसके हित ऐसे हैं  जिसके कारण वस्तुनिष्ठ रूप में उनका/उनकी कंपनी का दायित्व निष्पादन कठिन  बन जाता है । हितों का विरोधाभास तब भी हो सकता है, जब निदेशक या उसके परिवार का सदस्य किसी व्यावसायिक  अस्तित्व से उसके संबंधों के कारण व्यावसायिक अस्तित्व या किसी तीसरे पक्ष से अनुचित व्यक्तिगत लाभ लेता है या तीसरे पक्षों द्वारा निदेशकों या उसके परिवार सदस्यों के लिए रु.500/- से अधिक मूल्य की भेंट वस्तुएं, ऋण या बाध्यताओं के प्रति गारंटी, हितों का विरोधाभास उत्पन्न कर सकती हैं । बोर्ड के अनुमोदन के सिवां, निदेशकों के लिएये बातें करना प्रतिबंधित है :

(क)    कंपनी के अवसर को वंचित करके व्यक्तिगत लाभ लेना ।

(ख) कंपनी के साथ प्रतिस्पर्धा करना ।

(ग) व्यक्तिगत लाभ के लिए निगमित संपत्ति, जानकारी या स्थिति का उपयोग      करना ।

यह कंपनी की नीति है कि ऐसे विरोधाभासों को प्रतिबंधित करना जो कई बार पूर्णत: स्पष्ट नहीं है । यदि निदेशकों को किसी स्थिति के विषय के बारे में शंका है तो उनसे विनती है कि वे अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अथवा अनुपालन अधिकारी से संपर्क करें । कोई निदेशक किसी विरोधाभास या संभावित विरोधाभास से अवगत होता है तो उसे उसकी ओर अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अथवा अनुपालन अधिकारी का ध्यान आकर्षित करवाना चाहिए ।

8. गोपनीयता :

.  सभी निदेशकों को कंपनी द्वारा उनको विश्वासपूर्वक दी गयी गोपनीयता जानकारी की गोपनीयता बनाये रखनी चाहिए । निदेशक किसी भी तीसरे पक्ष को इस तरह की जानकारी तब तक नहीं देंगे जब तक कंपनी द्वारा यह जानकारी देने का अधिकार उसे न दिया गया हो या कोई कानूनी आवश्यकता न हो । गोपनीय जानकारी  इस वाक्यांश में गैर सार्वजनिक जानकारी जिसका उपयोग कंपनी के प्रतिस्पर्धकों द्वारा किया जा सकता है या इसका प्रकटन कंपनी या उसके उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह हो सकता है तक शामिल है । जब कभी भी निदेशकों को इसका विश्वास है कि गोपनीय जानकारी प्रकट करना उनके लिए कानूनी बाध्यता है तो इस विषय में उन्हें अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक से अथवा अनुपालन अधिकारी से परामर्श करना चाहिए ।

9. उचित व्यवहार :

दिए गए प्रकार्यात्मक दायित्वों के अनुसार प्रत्येक निदेशक को कंपनी के उपभोगताओं, आपूर्तिकर्ताओं, प्रतिस्पर्धकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ उचित व्यवहार करना चाहिए । किसी को भी किसी का  विशेषाधिकार, जानकारी के प्रकलन, गुप्तता के दुरूपयोग से या तथ्यों के मिथ्या कथन से या किसी अनुचित तरीके से अनुचित लाभ नहीं लेना चाहिए । मालिकाना सूचनाओं का असंगत प्रयोग करना, व्यापारिक गुप्त प्रकटन, जानकारियों का गलत उपयोग करना या किसी पूर्व या विद्यमान कर्मचारी को इसके लिए प्रोत्साहित करना निषिद्ध है । कंपनी अधिनियम के तहत निदेशक को उसके दायित्व का निष्पादन अच्छी भावना, ईमानदारी और बिना किसी छलकपट के इरादे से करना   चाहिए ।

10. कंपनी की आस्तियों की सुरक्षा और उचित उपयोग :

सभी निदेशकों को अपने कर्तव्य का निर्वहन इस तरह करना चाहिए कि कंपनी की आस्तियाँ सुरक्षित रहें और उनका दक्ष उपयोग सुनिश्चित हो । कंपनी के सभी आस्तियों का उपयोग उसके विधिसंमत व्यवसाय के लिए किया जाना चाहिए ।

11. शिकायतें :

शिकायतों को स्वीकारने, प्रतिधारण करने और इसके निवारण के लिए उचित प्रतिक्रिया बनाने का दायित्व मुख्य सतर्कता अधिकारी का है । मुख्य सतर्कता अधिकारी लेखापरीक्षा समिति की बैठकों में स्थाई रूप से आमंत्रित होंगे । कोई भी निदेशक जिसे किसी मामले के संबंध में चिंता या शिकायत है उनसे विनती है कि वे अपनी शिकायत अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी या अनुपालन अधिकारी के पास भेजें, जो इन शिकायतों को गोपनीय समझेगा ।


12. किसी गैर कानूनी या अनैतिक व्यवहार की रिपोर्ट :

निदेशक से विनती है कि यदि उन्हें विश्वास है कि उन्होंने किसी कर्मचारी, अधिकारी या निदेशक या कोई अन्य व्यक्ति जो कंपनी की ओर से कार्य कर रहा है और रिपोर्ट करने वाले निदेशक को किसी विशेष स्थिति में की जानेवाली सर्वश्रेष्ठ कार्रवाई के प्रति शंका है, तो उसे तुरंत अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक या अनुपालन अधिकारी से संपर्क करना चाहिए ।

13. संशोधन, सुधार :

प्रकटन एवं स्टॉक एक्सचेंज द्वारा जारी सूचीबद्ध समझौते के प्रावधानों तथा इस संबंध में सेबी के निदेशों और बनायी गयी अन्य किसी नियमावली के तहत इस संहिता को संशोधित किया जा सकता है, बदला जा सकता है या इसको  छोड दिया जा सकता है।

 

आर.सी.एफ.