डीमैट (डि-मटेरियलायझेशन)
निक्षेपी : मुख्य निक्षेपी कंपनी अधिनियम 1956 के अधीन गठित संस्था है, जिसे सेबी द्वारा निक्षेपी के रुप में कार्य करने के लिए प्रमाणपत्र जारी किया गया है । इस समय नेशनल सेक्युरिटी डिपॉझिट लिमिटेड (एन.एस.डी.एल.) तथा सेन्ट्रल डिपॉझिटरी सेवाएँ (इंडिया) लिमिटेड (सीडीएसएल) नाम की दो निक्षेपी हैं ।
डीमैट (डि-मटेरियलायझेशन)
निक्षेपी : मुख्य निक्षेपी कंपनी अधिनियम 1956 के अधीन गठित संस्था है, जिसे सेबी द्वारा निक्षेपी के रुप में कार्य करने के लिए प्रमाणपत्र जारी किया गया है । इस समय नेशनल सेक्युरिटी डिपॉझिट लिमिटेड (एन.एस.डी.एल.) तथा सेन्ट्रल डिपॉझिटरी सेवाएँ (इंडिया) लिमिटेड (सीडीएसएल) नाम की दो निक्षेपी हैं ।
डीपी : निक्षेपी सहभागिता : किसी भी डीपी का सेबी के साथ पंजीकरण आवश्यक है । यह एनएसडीएल या सीडीएसएल की हो सकती है । बैंकिंग प्रणाली में डीपी बैंक की तरह है तथा वह पैसे के खातों के स्थान पर प्रतिभूतियों के खातों की देखरेख करता है ।
डीपी/आईडी : सेबी के साथ पंजीकृत हर डीपी का अपना एक विशेष पंजीकरण क्रमांक होगा । यह डीपी आईडी के नाम से जाना जाता है । डीपी आईडी सदैव च्INछ से शुरु होता है और उसके बाद संख्याएँ होती है।
ग्राहक आईडी : यह लाभार्थी खाता/डिमैट खाता क्रमांक के रुप में जाना जाता है । यह मुद्रा के खाते की ही तरह जब भी प्रतिभूति खाता किसी डीपी के साथ खोला जाता है, तब डीपी द्वारा एक खाता क्रमांक दिया जाता है । जो ग्राहक आईडी/लाभार्थी खाता/डीमैट खाता क्रमांक के रुप में जाना जाता है ।
डीआरएफ : डीमटेरिअलाइझेशन विनंती पत्र : प्रत्यक्ष प्रतिभूति प्रमाणपत्रों को इलेक्ट्रॉनिक रुप में बदलने के लिए इसे तीन प्रतियों में भरकर प्रमाणपत्रों के साथ डीपी के पास जमा करना आवश्यक है । डीआरएफ संबंधित डीपी से प्राप्त किया जा सकता है ।
सुपुर्दगी अनुदेश पुस्तिका (डीआईबी) : इन पर्चियों का उपयोग बेची गयी/स्थानांतरित की गई प्रतिभूतियों की संख्या को खाते में से नामे करने के लिए किया जाता है । डीपी द्वारा अपने ग्राहकों को डीआईबी जारी किया जाता है, जिस पर खातेदार का नाम और उसका ग्राहक आईडी पूर्व मुद्रित होता है । निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे पूर्व-मुद्रित डीआईबी का उपयोग करें और इसे सुरक्षित अभिरक्षा में रखें ।
आईएसआईएन : यह आंतर्राष्ट्रीय प्रतिभूति पहचान क्रमांक का संक्षिप्त रुप है । निक्षेपी में दी गई हर प्रतिभूति को विशेष पहचान क्रमांक दिया जाता है, जिसे आईएसआईएन कहा जाता है ।
शेयरों का डिमटेरिअलाइझेशन एवं इसके लाभ : परम्परागत रुप से शेयर प्रत्यक्ष या कागज के रुप में रखे जाते थे । शेयरों को प्रत्यक्ष रुप में रखने में कई कमियाँ थी । इलेक्ट्रॉनिक रुप में व्यापार करने या रखने से ये कमियाँ या तो पूरी तरह से दूर होे गई हैं या इन्हें काफी कम किया जा चुका है । डीमटेरिअलाइझेशन प्रत्यक्ष रुप से रखी गई प्रतिभूति को इलेक्ट्रॉनिक रुप में बदलने की प्रक्रिया है । शेयर और अन्य प्रतिभूतियों को डिमटेरिअलाइज्ड (इलेक्ट्रॉनिक) रुप में रखने के निम्न लाभ हैं :-
1. कारोबार अर्थात् बिक्री, क्रय, स्थानांतरण, प्रेषण इत्यादि आसानी से और शीघ्रता से होता है ।
2. प्रतिभूतियों, प्रमाणपत्रों के खो जाने, चोरी हो जाने या बहुपक्षीय होने की सभी चिंताओं से छुटकारा ।
3. आपके पास प्रामाणिक प्रतिभूतियाँ होती हंै, फर्जी प्रमाणपत्र रखने का जोखिम नहीं ।
4. कागजी कारोबार कम होने से, आपके निगम के और अंतत: देश की लागत में बचत होती है ।
5. हस्तांतरण की लागत कम होती है - इसमें मुद्रा शुल्क (स्टॅम्प ड्युटी) नहीं लगता ।
6. गलत सुपुर्दगी की जोखिम नहीं ।
7. बोनस/राइट इश्यू का तुरंत आबंटन होना/जमा होना ।
शेयरों का डिमैट करने की प्रक्रिया : जब आप आपकी प्रत्यक्ष प्रतिभूतियों को प्रत्यक्ष स्वरुप से इलेक्ट्रानिक स्वरुप में बदलना चाहते हैं, तब आप किसी एक डीपी के पास जाकर अपना डिमैट खाता खोलें । आपको एक ग्राहक आईडी दिया जाएगा । उसके बाद डीआरएफ भरकर अपने प्रमाणपत्र अपने डीपी के पास जमा करें । डीआरएफ प्राप्त होने के बाद डीपी आपको एक क्रमांक देता है, जिसे डिमैट विनंती क्रमांक (डीआरएन) कहते हैं । इसके बाद वह इन प्रमाणपत्रों को डीआरएफ के साथ कंपनी/शेयर रजिस्ट्रार के पास भेजने की व्यवस्था करता है । कंपनी/शेयर रजिस्ट्रार सत्यापन के बाद डीआरएन की पुष्टि करता है । डिमटेरिअलाइज्ड किये गए शेयरों की संख्या की पुष्टि के बाद इसे इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप के संबंधित डिमैट खाते में जमा किया जाता है । इस प्रक्रिया को डीमटेरिअलाइजेशन कहा जाता है । यदि आप चाहते हैं, तो आपके इन शेयरों को पुन: कागजी स्वरुप में बदल सकते हैं । इस प्रक्रिया को रि-मटेरिअलाइजेशन कहा जाता है ।
इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप के शेयरों केसाथ कारोबार करना (जैसे बिक्री या क्रय तथा हस्तांतरण/प्रेषण इत्यादि) इलेक्ट्रानिक स्वरुप बहुत ही सरल तरीके एवं शीघ्रता से किया जा सकता है । प्रत्यक्ष स्वरुप की ही तरह, इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप में भी प्रतिभूतियों की बिक्री स्टॉक एक्सचेंज में पंजीकृत ब्रोकर के मार्फत की जानी चाहिए । ब्रोकर द्वारा बिकवाली की पुष्टि किये जाने बाद, बेचनेवाले के बेची गयी प्रतिभूति की संख्या को नामें करने के लिए सुपुर्दगी अनुदेश भरकर नामे करने का अनुदेश अपने च्डीपीछ को देना होगा । प्रतिभूतियों की खरीदी के समय, ब्रोकर को भुगतान करने के बाद, अपने च्डीपीछ से खरीदे गए शेयरों की संख्या अपने खाते से नामे करने के लिए तथा क्रेता के खाते में जमा करने के लिए कहेगा ।
प्रत्यक्ष शेयरों का डिमैट करने के लिए भुगतान किए जानेवाला प्रभार डिमटेरियलाइजेशन/डिमैट खाता रखने, बिकवाली और खरीदी इत्यादि कारोबार पर लगनेवाले प्रभार का वहन निवेशक द्वारा किया जाएगा । ये प्रभार अलग-अलग डीपी के लिए अलग-अलग होते हैं और इसे निवेशकों द्वारा नामित बैंक खाते से नामे किया जाता है ।
डिमैट किए हुए शेयरों पर डिविडेंड का भुगतान कैसे किया जाता है ?
रेकार्ड दिनांक को डिमैट स्वरुप में अपनी कंपनी के शेयर रखनेवाले लाभार्थियों की जानकारी कंपनी डाउन लोड करती है । इस जानकारी के आधार पर कंपनी बैठक की सूचना, वार्षिक रिपोर्ट और निगमित लाभ जैसे लाभांश/राईट/बोनस इत्यादि भेजती है । डिमैट स्वरुप में शेयर रखनेवाले शेयरधारक के अधिकार, प्रत्यक्ष स्वरुप के धारक के समान ही होते हैं ।
डिमैट खाते का उपयोग करने में किसी प्रकार की जालसाजी/विवाद की जोखिम के घटक और ऐसे मामलों में किससे संपर्क करें ?
प्रत्यक्ष शेयरों से संबंधित कारोबार में, सामान्य जोखिम के घटक, जैसे हस्ताक्षर का न मिलना, डाक पारवहन के दौरान शेयरों का खो जाना इत्यादि इसमें नहीं है, क्योंकि डिमैट किए हुए शेयर प्रतिभूति पत्र के स्वरुप में नहीं होते । फिर यदि किसी अन्य विवाद की स्थिति में, संबंधित शेयर बाजार और/या निक्षेपी सहभागी, निक्षेपी अभिरक्षक अर्थात् एनएसडीएल/ सीडीएसएल या सेबी से समाधान के लिए संपर्क करना होगा ।
किसी प्रकार का निधि/ऋण प्राप्त करने के लिए बैंकरों के पास शेयरों को गिरवी रखना : शेयरों को डिमैट मोड में गिरवी रखना बहुत ही आसान है । इसके लिए केवल आपको प्लेज क्रिएशन फार्म (फार्म w/प्रदर्श (Exhibit) 15) भरकर आपके डीपी को देना है ।
डिमैट संबंधी शंकाएँ किसे संबोधित करें : चूंकि आपका डिमैट खाता डीपी द्वारा बनाए रखा जाता है, अत: पते में बदलाव, बैंक के खातों के तफसील में परिवर्तन, इसीएस अधिकार, नामितों का पंजीकरण इत्यादि तथा अपने डिमैट खाते से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए पत्र/पत्राचार अपने डीपी के साथ किया जाना चाहिए । चूंकि कंपनी/शेयर रजिस्ट्रार के पास आपके निक्षेपी खाते संबंधी कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं होती है, अत: उपरोक्त विषय से संबंधित किसी अनुरोध पर उसके द्वारा विचार नहीं किया जाएगा ।
शेयरों का हस्तांतरण - प्रत्यक्ष स्वरुप : आरसीएफ के शेयरों की खरीदी के बाद उन्हें पंजीकृत कैसे किया जाए तथा उचित स्टॅम्प डयूटी के साथ हस्तांतरण विलेख (deed) प्रस्तुत करने पर इसमें कितना समय लगता है । शेयर प्रमाणपत्र और हस्तांतरण विलेख को पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रार एवं हस्तांतरण एजेंट के पास भेज दें । इसमें लगभग 15 दिन का समय लगेगा ।
शेयरों का हस्तांतरण - प्रत्यक्ष स्वरुप : आरसीएफ के शेयरों की खरीदी के बाद उन्हें पंजीकृत कैसे किया जाए तथा उचित स्टॅम्प डयूटी के साथ हस्तांतरण विलेख (deed) प्रस्तुत करने पर इसमें कितना समय लगता है । शेयर प्रमाणपत्र और हस्तांतरण विलेख को पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रार एवं हस्तांतरण एजेंट के पास भेज दें । इसमें लगभग 15 दिन का समय लगेगा ।
हस्तांतरण के लिए शेयर कहाँ भेजे जाए ?
शेयर हस्तांतरण के लिए रजिस्ट्रार एवं हस्तांतरण एजेंट के पास आगे दिए गए पतों पर भेजा जाए ।
साथ ही हस्तांतरण की विनंती निगम के किसी भी कार्यालय में भेजी जा सकती है, जो शेयर विभाग के द्वारा किए जानेवाले सत्यापन के अधीन होगा ।
शेयर के हस्तांतरण पर देय स्टॅम्प डयुटी : इस समय यह विचाराधीन शेयर के कुल मूल्य के 0.5% की दर से देय है ।
शेयर में अतिरिक्त सहधारक का नाम जोडने की प्रक्रिया : किसी भी अतिरिक्त नाम को जोडने का अर्थ है शेयर का हस्तांतरण । अत: इसके लिए शेयर हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया की अनुपालन करने की आवश्यकता है ।
काफी समय पहले खरीदे गए शेयरों के विषय में अनुपालित की जानेवाली पध्दति : आपसे विनंती है कि जिस कंपनी रजिस्ट्रार ने हस्तांतरण विलेख जारी किया है, उससे संपर्क करें तथा विलेख को पुन:वैधीकृत करवाएँ । पुन: वैधीकरण के बाद, शेयर प्रमाणपत्र तथा हस्तांतरण विलेख हस्तांतरण के लिए प्रस्तुत करें ।
दो या दो से अधिक शेयरों के फोलियो का समेकन : अलग अलग फोलियो का समेकन संभव है । बशर्तें उनके नामों (सहधारकों के मामले मेंं) का क्रम सभी फोलियो में समान हो । इसके लिए सभी धारकों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र देना पर्याप्त है । इसके लिए शेयर हस्तांतरण विलेख प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है ।
सहधारिकता के मामले में शेयर का प्रेषण : एक शेयरधारक की मृत्यु होने पर उत्तरजीवी अपने नाम पर शेयर कैसे करवा सकते हैं ?
किसी एक सहशेयरधारक की मृत्यु होने की स्थिति में, निगम को शेयर धारक के मृत्यु के प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति के साथ एक आवेदन देना होगा । निगम को, मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ अनुरोध पत्र एवं सभी शेयर प्राप्त होने पर, निगम मृत शेयरधारक का नाम हटाकर, बचे हुए शेयर होल्डरों के पक्ष में पुष्टि करके शेयर प्रमाणपत्र लौटा देगा ।
यदि शेयर एक ही शेयर होल्डर के नाम पर है और उसकी मृत्यु हो जाती है और उसने कोई वसीयत नहीं छोडी है, तो उसके कानूनी वारिस (पति/पत्नी/बेटा/बेटी) अपने नाम पर शेयर कैसे प्रेषित कर सकते हैं?
यह शेयरों का प्रेषण है । इस स्थिति में मृत सदस्य का संपदा का मालिकाना हक प्रमाणित करना अत्यंत कठीन है । शेयरों के प्रेषण के लिए निगम के पास शेयर प्रमाणपत्र (त्रों) के साथ निम्न दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक है :-
क. प्रेषण के लिए लिखित विनंती ।
ख. मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति ।
ग. निम्न में से किसी एक की प्रमाणित प्रति :
1. न्यायालय से प्राप्त प्रोबेट की प्रति,
2. न्यायालय द्वारा दिया गया प्रशासन पत्र (यदि लागू होता है)
3. उत्तराधिकार प्रमाणपत्र यदि लागू होता है तोे तथा
4. हक विलेख यदि आवश्यक हो तो
5. अन्य कानूनी वारिसों से अनापत्ति प्रमाणपत्र यदि कोई है तो, विशेष परिस्थितियों में, उपरोक्त च्ʄाछ में बताए गए कोई दस्तावेज न होने पर, रु.200/- के स्टॅम्प पेपर पर क्षतिपूर्ति बंध तथा रु.20/- के स्टॅम्प पेपर पर प्रतिज्ञा पत्र प्राप्त होने पर, कंपनी द्वारा शेयरों के प्रेषण पर विचार किया जा सकता है ।
प्राप्त न हुए डिविडंड : आपको जिन शेयरों के डिविडंड प्राप्त नहीं हुए हैं, उसके फोलिओ क्रमांक/डीपी आइडी तथा ग्राहक आईडी (डिमैट शेयरों के मामले में) की जानकारी देते हुए कंपनी सचिव, आरसीएफ लि. को पत्र लिखें । सत्यापन के बाद, यदि निगम के रिकार्ड के अनुसार डिविडंड का भुगतान नहीं किया गया है, दूसरा डिविडंड वॉरंट जारी किया जाएगा ।
यदि मूल डिविडंड वॉरंट की वैधता अवधि समाप्त नहीं हुई है तो, डिविडंड वॉरंट की दूसरी प्रति प्राप्त करने की प्रक्रिया : चूंकि मूल वॉरंट की वैधता के दौरान डिविडंड वॉरंट की दूसरी प्रति जारी नहीं की जा सकती है । अत: आपको वैधता की तारीख समाप्त होने तक इंतजार करना होगा । तथापि वैधता अवधि समाप्त होने के बाद इस बात का समाधान होता है कि हमारे रिकार्ड के अनुसार वॉरंट का नकदीकरण नहीं हुआ है, तो आपको इसके लिए कोरे कागज पर एक वचनपत्र लिखकर देना होगा । इस संबंध में वचनपत्र प्राप्त होने के बाद, दूसरा डिविडंड वॉरंट आपको जारी किया जाएगा ।
यदि आपके पास प्रत्यक्ष स्वरुप में शेयर हैं तो कपटपूर्ण नकदीकरण से बचने के लिए अनुपालित की जानेवाली प्रक्रिया : आप आपके फोलियो क्रमांक, आपके बैंक का खाता क्रमांक, नाम और पता लिख कर हमें सूचित करें । आरसीएफ इसका उल्लेख आपको भविष्य में भेजे जानेवाले सभी वॉरंट में करेगा । यदि आपके शेयर डिमैट स्वरुप में हैं तो ये जानकारियाँ आपको अपने डीपी को देनी होगी । आपका डीपी यह जानकारी आरसीएफ को प्रदान करेगा । यह प्रक्रिया निक्षेपी विनियमावली के अनुसार है ।
शेयर प्रमाणपत्र खो जाने पर : शेयर प्रमाणपत्र खो जाने पर शेयर प्रमाणपत्र की दूसरी प्रति प्राप्त करने के लिए अपना फोलियो क्रमांक और शेयर प्रमाणपत्रों का विवरण उद्धृत करते हुए खोए हुए शेयरों की सूचना तुरंत रजिस्ट्रार और हस्तांतरण एजेंट को दें साथ ही शेयर प्रमाणपत्र खो जाने की शिकायत आपको पुलिस में दर्ज करानी है । एफआइआर की प्रति प्राप्त होने पर आगे की कारवाई के लिए कंपनी आपसे तुरंत संपर्क करेगी ।
पते में परिवर्तन की प्रक्रिया : दिए गए पते में परिवर्तन करने के लिए नए पते और पुराने पते का उल्लेख करते हुए एक विनंती पत्र भेजें ।
क्या सहधारक पते में परिवर्तन की विनंती कर सकते हैं ?
हाँ, वे कर सकते हैं । (इस स्थिति में सभी शेयरधारकों के हस्ताक्षर का पत्र आवश्यक है)
क्या एक ही फोलियो के लिए अलग अलग पते हो सकते हैं ?
नहीं, पत्राचार के लिए एक से अधिक पते नहीं हो सकते ।
नामांकन: शेयर धारिकता के संबंध में नामांकन कैसे किया जाए ?
आपको यथोचित भरा हुआ एवं हस्ताक्षरित नामांकन पत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत करना होगा । यदि शेयर सहधारिकता में है तो नामांकन पत्र पर सभी शेयर धारकों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं । नामांकन के पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त होने पर, कंपनी नामांकन पंजीकृत करेगी एवं पंजीकरण क्रमांक प्रदान करेगी । नामांकन पत्र की दूसरी प्रति, जिस पर पंजीकरण क्रमांक एवं दिनांक लिखा हुआ होगा, पृष्ठांकन करके लौटा दी जाएगी ।
एक बार किए गए नामांकन में परिवर्तन : एक बार किया गया नामांकन, शेयरधारक द्वारा नया नामांकन देकर प्रतिसंहारित किया जा सकता है । यदि नया नामांकन किया जाता है, तो पिछला नामांकन प्रतिसंहारित माना जाएगा । यदि सहधारक नामांकन करते हैं और उनमें से एक धारक की मृत्यु हो जाती है तो जीवित धारकों द्वारा नया नामांकन भरा जा सकता है ।
नामांकित व्यक्ति द्वारा अपने नाम पर शेयर करने की प्रक्रिया :
नामांकित व्यक्ति द्वारा शेयर अपने नाम पर प्रेषित करने के लिए निम्न दस्तावेज भेजने होंगे :-
क. मृत्यु प्रमाणपत्र की साक्ष्यांंकित प्रति ।
ख. मूल शेयर प्रमाणपत्र और
ग. पहचान के लिए प्रमाण ।
नामांकित व्यक्ति के पंजीकरण के बिना शेयरों की बिकवाली :
नामांकित व्यक्ति को पहले अपने नाम पर शेयरों को प्रेषित करना होगा उसके बाद ही वह उन शेयरों की बिकवाली का अधिकारी होगा ।
डिमैट स्वरुप में धारित शेयरों के लिए नामांकन : डिमैट किए हुए शेयरों के नामांकन के लिए शेयर धारक को संबंधित डीपी से संपर्क करना होगा । डिमैट खाता खोलने के लिए निसंचयी सहभागी द्वारा दिए फॉर्म में नामित व्यक्ति का नाम लिखने का स्थान दिया गया है । अधिक विवरण के लिए अपने निसंचयी सहभागी से संपर्क करें ।
विविध वे कौन से स्टॉक एक्सचेंज हैं जहाँ आरसीएफ के शेयर सूचीबद्ध हैं और उनका कारोबार होता है ?
आरसीएफ के शेयर स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई (बीएसई) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में सूचीबद्ध हैं और इनका कारोबार सभी स्टाक एक्सचेंजों पर किया जा सकता है ।



